साल 1975 की बात है। तमिल फिल्म इंडस्ट्री में एक ऐसे व्यक्ति ने कदम रखा, जो कभी बस कंडक्टर की नौकरी करता था, लेकिन उसके व्यक्तित्व में एक अलग ही चमक थी। चलने, बोलने और व्यवहार करने का ऐसा अंदाज कि बस कंडक्टर रहते हुए ही लोग उसके दीवाने हो जाते थे। उसकी इस प्रतिभा को सबसे पहले उसकी गर्लफ्रेंड ने पहचाना। एक दिन उसने रजनीकांत से कहा तुम्हें हीरो बनना चाहिए। रजनीकांत के मन में पहले से ही अभिनय करने की इच्छा थी, इसलिए उन्होंने निर्मला की बात मानते हुए फिल्म इंस्टीट्यूट में एडमिशन लेने का निर्णय किया। लेकिन घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, इसलिए परिवार इस फैसले के खिलाफ था। तब उनके दोस्त और को-वर्कर राज बहादुर ने आर्थिक मदद की, जिसके बाद रजनीकांत ने इंस्टीट्यूट में दाखिला ले लिया। एक्टिंग कोर्स के दौरान ही एक दिन मशहूर साउथ निर्देशक के. बालाचंदर की नजर रजनीकांत पर पड़ी। उन्होंने रजनीकांत से कहा कि अगर वे तमिल भाषा सीख लें, तो वो उन्हें अपनी फिल्म में मौका देंगे। रजनीकांत ने कुछ ही दिनों में तमिल भाषा पर मजबूत पकड़ बना ली और उन्हें फिल्म अपूर्वा रागंगल (1975) में पहला रोल मिला। शुरुआत में उन्होंने खलनायक के किरदार ही किए, लेकिन उन किरदारों में भी उनकी अलग ही छाप थी। इसके बाद उन्होंने कभी शिवाजी का, कभी सूर्या का और यहां तक कि रोबोट बनकर भी ऐसा दमदार अभिनय किया कि वे धीरे-धीरे जनता के दिलों में बस गए। और इसी तरह एक साधारण बस कंडक्टर से शुरू हुआ सफर उन्हें बना गया थलाइवा यानी दक्षिण का सुपरस्टार रजनीकांत। आज रजनीकांत के 75वें जन्मदिन पर जानते हैं उनके कुछ ऐसे दमदार किरदारों के बारे में, जिन्होंने उन्हें जनता के बीच एक अलग और अविस्मरणीय पहचान दिलाई। फिल्म- थलपति
किरदार- सूर्या 1991 की फिल्म थलपति में रजनीकांत ने सूर्या का किरदार निभाया है। सूर्या गरीब है, लेकिन दिल से नेक और सच्चा इंसान है। परिस्थितियों के कारण वह अपराध की दुनिया में फंस जाता है, फिर भी अपने दोस्तों और परिवार के प्रति हमेशा वफादार रहता है। उसका अपनी मां के लिए प्रेम, दोस्तों के लिए सच्ची दोस्ती और प्रेमिका के साथ भावनात्मक रिश्ता उसे दर्शकों के लिए बेहद खास बनाते हैं। फिल्म में रजनीकांत ने अपने स्टाइल और अभिनय का ऐसा अनोखा मेल दिखाया कि यह किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में दर्ज है। दमदार डायलॉग: मित्रता का कानून बहुत कठोर है। अगर आप उसे तोड़ेंगे, तो परिणाम भी उसी तरह कठोर होंगे। फिल्म- बाशा
किरदार: माणिक बाशा बाशा (1995) एक भारतीय तमिल-भाषा की गैंगस्टर एक्शन फिल्म है। इसमें रजनीकांत ने माणिक बाशा नाम के एक ऑटो ड्राइवर का किरदार निभाया है, जो अपने अतीत में एक खतरनाक गैंगस्टर रह चुका होता है। उनकी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस ने इस फिल्म को एक कल्ट क्लासिक का दर्जा दिलाया। इस फिल्म के लेखक और निर्देशक सुरेश कृष्ण थे। दमदार डायलॉग: मैं एक बार कह दूं, तो यह सौ बार कहने के बराबर है। फिल्म- शिवाजी: द बॉस
किरदार: शिवाजी शिवाजी: द बॉस (2007) एक तमिल फिल्म है, जिसमें रजनीकांत ने शिवाजी नाम के एक एनआरआई इंजीनियर का किरदार निभाया है। शिवाजी भारत लौटकर समाजसेवा करना चाहता है और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई छेड़ देता है। इस फिल्म का निर्देशन एस. शंकर ने किया था और संगीत ए. आर. रहमान ने दिया था। यह फिल्म बाद में हिंदी में भी डब की गई, जो दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय रही। फिल्म- रोबोट
किरदार- रोबोट फिल्म रोबोट साल 2010 में रिलीज हुई थी। तमिल में इसका नाम एंथिरन और हिंदी में रोबोट था। इस फिल्म में रजनीकांत ने डबल रोल निभाया था। डॉ. वसीकरन, जो एक वैज्ञानिक हैं और चिट्टी, जो उनका ही बनाया हुआ एक अत्याधुनिक रोबोट है। दमदार डायलॉग- मैं चिट्टी हूं, एक मानव जैसा रोबोट। फिल्म- कबाली
किरदार- कबाली साल 2016 में निर्देशक पा. रंजीत ने रजनीकांत और राधिका आप्टे के साथ फिल्म कबाली बनाई। फिल्म में रजनीकांत ने एक पुराने गैंगस्टर का रोल निभाया है, जो अपने खोए हुए परिवार को ढूंढता है। इस फिल्म में उनका भावनात्मक और गंभीर अभिनय बहुत पसंद किया गया। फिल्म- काला
किरदार- काला पा. रंजीत के निर्देशन में बनी फिल्म काला 2018 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में रजनीकांत, हुमा कुरैशी और नाना पाटेकर नजर आए। मुंबई के धारावी इलाके में सेट इस फिल्म में उन्होंने एक लोकल नेता और गैंगस्टर ‘काला’ का रोल निभाया जो गरीबों के हक के लिए लड़ता है। फिल्म सामाजिक मुद्दों पर गहरी टिप्पणी करती है। फिल्म- लिंगा
किरदार- राजा लिंगेश्वरन फिल्म ‘लिंगा’ साल 2014 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में रजनीकांत ने डबल रोल निभाया। एक ऐतिहासिक राजा और दूसरा वर्तमान समय का इंजीनियर। फिल्म में सामाजिक विकास और बांध निर्माण जैसे मुद्दों को दिखाया गया। इसमें अनुष्का शेट्टी और सोनाक्षी सिन्हा भी नजर आईं। दमदार डायलॉग: मुझे अपना शहर, देश, संस्कृति और भगवान पसंद है और मैं उन्हीं के लिए काम करता हूं। फिल्म- दरबार
किरदार- आदित्य अरुणाचलम साल 2020 में निर्देशक ए. आर. मुरुगदॉस की फिल्म ‘दरबार’ आई। इस फिल्म में रजनीकांत ने आदिल अरुणाचलम नाम के पुलिस अधिकारी का किरदार निभाया। वह अपने परिवार की हत्या का बदला लेने के लिए कानून की सीमाओं को पार कर जाता है। दमदार डायलॉग: कानून की सीमा लांघकर मैं खुद न्याय दिलाऊंगा। एक नजर रजनी के फैंस के किस्सों पर… रजनीकांत ने अपने अभिनय करियर में जो भी किरदार निभाए, उन्हें उनके फैंस ने इतना पसंद किया कि लोग उनकी फिल्में देखने के लिए कुछ भी कर गुजरते थे। किसी ने जहर खा लिया, तो किसी ने मरते-मरते ही उनकी फिल्म देखी। रजनीकांत इवेंट में नहीं पहुंचे तो निराश फैन ने खाया जहर रजनीकांत के फैंस को उम्मीद थी कि 2017 में जन्मदिन के मौके पर रजनीकांत राजनीति में एंट्री लेने की अनाउंसमेंट करेंगे, लेकिन बिजी होने के कारण रजनीकांत को चेन्नई से बाहर जाना पड़ा। रजनीकांत की नामौजूदगी से आएजुमलाइ नाम का एक फैन इतना दुखी हुआ कि उसने जहर खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की। ये शख्स रजनीकांत के नाम पर एक बड़ा फैन क्लब भी चलाता है। कैंसर पीड़ित फैन ने चोरी छिपे देखी रजनीकांत की फिल्म, थिएटर में ही हुई मौत तमिलनाडु के चेत्तिपाल्यम में रहने वाले 56 साल के राजेंद्रन को फाइनल स्टेज का कैंसर था। वो रजनीकांत की फिल्म लिंगा देखने थिएटर जाना चाहते थे, लेकिन डॉक्टर्स ने उन्हें सिर्फ आराम करने की सलाह दी थी। जिद करने पर भी जब घरवाले नहीं माने तो राजेंद्रन एक रात चोरी-छिपे फिल्म देखने निकल गए। रात के करीब डेढ़ बजे थिएटर के सफाई कर्मचारी ने देखा कि राजेंद्रन का सीट पर बैठे हुए ही निधन हो गया। रजनीकांत के ठीक होने पर फैंस ने फोड़े थे 108 नारियल 2021 में रजनीकांत रूटीन चेकअप के लिए अस्पताल में भर्ती हुए। जैसे ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली तो फैंस ने 108 नारियल फोड़े थे। एक नजर रजनीकांत की पर्सनल लाइफ पर… घर चलाने के लिए बने कुली और बस कंडक्टर पिता के रिटायरमेंट के बाद रजनीकांत के परिवार का गुजारा कर पाना मुश्किल था। कम उम्र में ही घर चलाने के लिए रजनी खुद कुली बनकर लोगों का बोझ उठाने लगे और छोटे-मोटे काम कर पैसे कमाने लगे। उनकी जिंदगी पटरी पर तब आई जब उन्हें बेंगलुरु ट्रांसपोर्ट सर्विस में बस कंडक्टर की नौकरी मिली। रजनीकांत जिस स्टाइल में टिकट देखते थे, उससे इम्प्रेस होकर प्लेराइटर टोपी मुनिप्पा ने उन्हें प्ले में हिस्सा लेने को कहा। ज्यादा कमाई करने के लिए रजनीकांत ने नौकरी के साथ कई नाटकों में भी हिस्सा लिया। मेडिकल स्टूडेंट से हुआ था प्यार, गर्लफ्रेंड ने कहा था- आपको हीरो बनना चाहिए बस कंडक्टर की नौकरी करते हुए रजनीकांत की दोस्ती बैंगलोर में ही पढ़ने वाली मेडिकल स्टूडेंट निर्मला से हो गई। कुछ समय बाद दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे और फिर दोनों को प्यार हो गया। एक दिन रजनीकांत ने अपनी गर्लफ्रेंड को प्ले देखने बुलाया। रजनीकांत का अभिनय इतना दमदार था कि उनकी गर्लफ्रेंड ने कहा- आपको हीरो बनना चाहिए। रजनीकांत खुद भी एक्टिंग सीखने की इच्छा रखते थे, तो एक दिन निर्मला ने उनका मद्रास फिल्म इंस्टीट्यूट में एडमिशन के लिए फॉर्म भर दिया, जिसकी बदौलत रजनीकांत का दाखिला हुआ था। रजनीकांत के हुनर ने खींचा डायरेक्टर का ध्यान एक्टिंग कोर्स के दौरान रजनीकांत पर तमिल फिल्म डायरेक्टर के. बालाचंदर की नजर पड़ी। के. बालाचंदर ने उन्हें तमिल सीखने की सलाह दी तो उन्होंने झट से सलाह मानकर तमिल भाषा बोलना और पढ़ना सीख लिया, लेकिन उन्हें कभी तमिल लिखना नहीं आया। इसके बाद बालाचंदर ने ही रजनीकांत को अपनी फिल्म अपूर्वा रागंगल (1975) में कास्ट किया। इस समय रजनी 25 साल के थे। फिल्म में उन्होंने फीमेल लीड के एक्स हस्बैंड की भूमिका निभाई थी। विवादित सब्जेक्ट होने के कारण कमल हासन और श्रीविद्या स्टारर ये फिल्म चर्चा में रही और इसने तीन नेशनल अवॉर्ड जीते थे। करियर की शुरुआत में रजनी तीन साल तक निगेटिव रोल में ही नजर आया करते थे। एक्टिंग छोड़ना चाहते थे रजनीकांत, डिस्ट्रीब्यूटर्स ने कहा था- अब रजनी नहीं चलेंगे 70 के दशक के आखिर में रजनीकांत की कई फिल्में बैक-टु-बैक फ्लॉप हो गईं। फिल्में फ्लॉप होने से उदास रजनीकांत एक्टिंग हमेशा के लिए छोड़ना चाहते थे। उन्होंने नई फिल्में साइन करनी छोड़ दीं, वहीं कुछ डिस्ट्रीब्यूटर्स और डायरेक्टर्स ने कहा कि रजनी अब नहीं चलेंगे। इसी बीच रजनीकांत को अमिताभ बच्चन की फिल्म डॉन की तमिल रीमेक फिल्म बिल्ला मिली। रजनीकांत, अमिताभ बच्चन को अपनी एक्टिंग इंस्पिरेशन मानते थे, तो वे एक्टिंग छोड़ने के बावजूद फिल्मों में लौटने के लिए राजी हो गए। 1980 में रिलीज हुई बिल्ला में डॉन बनकर रजनीकांत ने वो कमाल कर दिया कि फिल्म 25 हफ्तों तक सिनेमाघरों से नहीं उतरी। फिल्म जबरदस्त हिट रही और रजनीकांत तमिल सिनेमा के सबसे कामयाब हीरो बन गए। रजनीकांत ने शुरुआती 10 सालों में ही 100 फिल्में कर डालीं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। बिल्ला के बाद रजनीकांत ने तमिल के टॉप एक्टर्स में वो जगह बनाई, जो आज भी कायम है। समय के साथ दमदार रोल, दरियादिली और स्टाइल से रजनीकांत के फैंस बढ़ते ही चले गए। ————- बॉलीवुड की यह खबर भी पढ़िए… दिलीप कुमार की 103वीं बर्थ एनिवर्सरी:पोस्टर देखकर पिता को पता चला बेटा हीरो बना, आधी उम्र की लड़की से शादी की हुई थी भविष्यवाणी साल था 1922 का और जगह थी पेशावर। 11 दिसंबर की रात किस्सा ख्वानी बाजार की सोना बनाने वालों की गली में भयानक आग लगी थी। ठंडी, बर्फीली रात, तेज हवा और उससे भड़की आग, चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई। पूरी खबर पढ़ें..
किरदार- सूर्या 1991 की फिल्म थलपति में रजनीकांत ने सूर्या का किरदार निभाया है। सूर्या गरीब है, लेकिन दिल से नेक और सच्चा इंसान है। परिस्थितियों के कारण वह अपराध की दुनिया में फंस जाता है, फिर भी अपने दोस्तों और परिवार के प्रति हमेशा वफादार रहता है। उसका अपनी मां के लिए प्रेम, दोस्तों के लिए सच्ची दोस्ती और प्रेमिका के साथ भावनात्मक रिश्ता उसे दर्शकों के लिए बेहद खास बनाते हैं। फिल्म में रजनीकांत ने अपने स्टाइल और अभिनय का ऐसा अनोखा मेल दिखाया कि यह किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में दर्ज है। दमदार डायलॉग: मित्रता का कानून बहुत कठोर है। अगर आप उसे तोड़ेंगे, तो परिणाम भी उसी तरह कठोर होंगे। फिल्म- बाशा
किरदार: माणिक बाशा बाशा (1995) एक भारतीय तमिल-भाषा की गैंगस्टर एक्शन फिल्म है। इसमें रजनीकांत ने माणिक बाशा नाम के एक ऑटो ड्राइवर का किरदार निभाया है, जो अपने अतीत में एक खतरनाक गैंगस्टर रह चुका होता है। उनकी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस ने इस फिल्म को एक कल्ट क्लासिक का दर्जा दिलाया। इस फिल्म के लेखक और निर्देशक सुरेश कृष्ण थे। दमदार डायलॉग: मैं एक बार कह दूं, तो यह सौ बार कहने के बराबर है। फिल्म- शिवाजी: द बॉस
किरदार: शिवाजी शिवाजी: द बॉस (2007) एक तमिल फिल्म है, जिसमें रजनीकांत ने शिवाजी नाम के एक एनआरआई इंजीनियर का किरदार निभाया है। शिवाजी भारत लौटकर समाजसेवा करना चाहता है और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई छेड़ देता है। इस फिल्म का निर्देशन एस. शंकर ने किया था और संगीत ए. आर. रहमान ने दिया था। यह फिल्म बाद में हिंदी में भी डब की गई, जो दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय रही। फिल्म- रोबोट
किरदार- रोबोट फिल्म रोबोट साल 2010 में रिलीज हुई थी। तमिल में इसका नाम एंथिरन और हिंदी में रोबोट था। इस फिल्म में रजनीकांत ने डबल रोल निभाया था। डॉ. वसीकरन, जो एक वैज्ञानिक हैं और चिट्टी, जो उनका ही बनाया हुआ एक अत्याधुनिक रोबोट है। दमदार डायलॉग- मैं चिट्टी हूं, एक मानव जैसा रोबोट। फिल्म- कबाली
किरदार- कबाली साल 2016 में निर्देशक पा. रंजीत ने रजनीकांत और राधिका आप्टे के साथ फिल्म कबाली बनाई। फिल्म में रजनीकांत ने एक पुराने गैंगस्टर का रोल निभाया है, जो अपने खोए हुए परिवार को ढूंढता है। इस फिल्म में उनका भावनात्मक और गंभीर अभिनय बहुत पसंद किया गया। फिल्म- काला
किरदार- काला पा. रंजीत के निर्देशन में बनी फिल्म काला 2018 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में रजनीकांत, हुमा कुरैशी और नाना पाटेकर नजर आए। मुंबई के धारावी इलाके में सेट इस फिल्म में उन्होंने एक लोकल नेता और गैंगस्टर ‘काला’ का रोल निभाया जो गरीबों के हक के लिए लड़ता है। फिल्म सामाजिक मुद्दों पर गहरी टिप्पणी करती है। फिल्म- लिंगा
किरदार- राजा लिंगेश्वरन फिल्म ‘लिंगा’ साल 2014 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में रजनीकांत ने डबल रोल निभाया। एक ऐतिहासिक राजा और दूसरा वर्तमान समय का इंजीनियर। फिल्म में सामाजिक विकास और बांध निर्माण जैसे मुद्दों को दिखाया गया। इसमें अनुष्का शेट्टी और सोनाक्षी सिन्हा भी नजर आईं। दमदार डायलॉग: मुझे अपना शहर, देश, संस्कृति और भगवान पसंद है और मैं उन्हीं के लिए काम करता हूं। फिल्म- दरबार
किरदार- आदित्य अरुणाचलम साल 2020 में निर्देशक ए. आर. मुरुगदॉस की फिल्म ‘दरबार’ आई। इस फिल्म में रजनीकांत ने आदिल अरुणाचलम नाम के पुलिस अधिकारी का किरदार निभाया। वह अपने परिवार की हत्या का बदला लेने के लिए कानून की सीमाओं को पार कर जाता है। दमदार डायलॉग: कानून की सीमा लांघकर मैं खुद न्याय दिलाऊंगा। एक नजर रजनी के फैंस के किस्सों पर… रजनीकांत ने अपने अभिनय करियर में जो भी किरदार निभाए, उन्हें उनके फैंस ने इतना पसंद किया कि लोग उनकी फिल्में देखने के लिए कुछ भी कर गुजरते थे। किसी ने जहर खा लिया, तो किसी ने मरते-मरते ही उनकी फिल्म देखी। रजनीकांत इवेंट में नहीं पहुंचे तो निराश फैन ने खाया जहर रजनीकांत के फैंस को उम्मीद थी कि 2017 में जन्मदिन के मौके पर रजनीकांत राजनीति में एंट्री लेने की अनाउंसमेंट करेंगे, लेकिन बिजी होने के कारण रजनीकांत को चेन्नई से बाहर जाना पड़ा। रजनीकांत की नामौजूदगी से आएजुमलाइ नाम का एक फैन इतना दुखी हुआ कि उसने जहर खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की। ये शख्स रजनीकांत के नाम पर एक बड़ा फैन क्लब भी चलाता है। कैंसर पीड़ित फैन ने चोरी छिपे देखी रजनीकांत की फिल्म, थिएटर में ही हुई मौत तमिलनाडु के चेत्तिपाल्यम में रहने वाले 56 साल के राजेंद्रन को फाइनल स्टेज का कैंसर था। वो रजनीकांत की फिल्म लिंगा देखने थिएटर जाना चाहते थे, लेकिन डॉक्टर्स ने उन्हें सिर्फ आराम करने की सलाह दी थी। जिद करने पर भी जब घरवाले नहीं माने तो राजेंद्रन एक रात चोरी-छिपे फिल्म देखने निकल गए। रात के करीब डेढ़ बजे थिएटर के सफाई कर्मचारी ने देखा कि राजेंद्रन का सीट पर बैठे हुए ही निधन हो गया। रजनीकांत के ठीक होने पर फैंस ने फोड़े थे 108 नारियल 2021 में रजनीकांत रूटीन चेकअप के लिए अस्पताल में भर्ती हुए। जैसे ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली तो फैंस ने 108 नारियल फोड़े थे। एक नजर रजनीकांत की पर्सनल लाइफ पर… घर चलाने के लिए बने कुली और बस कंडक्टर पिता के रिटायरमेंट के बाद रजनीकांत के परिवार का गुजारा कर पाना मुश्किल था। कम उम्र में ही घर चलाने के लिए रजनी खुद कुली बनकर लोगों का बोझ उठाने लगे और छोटे-मोटे काम कर पैसे कमाने लगे। उनकी जिंदगी पटरी पर तब आई जब उन्हें बेंगलुरु ट्रांसपोर्ट सर्विस में बस कंडक्टर की नौकरी मिली। रजनीकांत जिस स्टाइल में टिकट देखते थे, उससे इम्प्रेस होकर प्लेराइटर टोपी मुनिप्पा ने उन्हें प्ले में हिस्सा लेने को कहा। ज्यादा कमाई करने के लिए रजनीकांत ने नौकरी के साथ कई नाटकों में भी हिस्सा लिया। मेडिकल स्टूडेंट से हुआ था प्यार, गर्लफ्रेंड ने कहा था- आपको हीरो बनना चाहिए बस कंडक्टर की नौकरी करते हुए रजनीकांत की दोस्ती बैंगलोर में ही पढ़ने वाली मेडिकल स्टूडेंट निर्मला से हो गई। कुछ समय बाद दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे और फिर दोनों को प्यार हो गया। एक दिन रजनीकांत ने अपनी गर्लफ्रेंड को प्ले देखने बुलाया। रजनीकांत का अभिनय इतना दमदार था कि उनकी गर्लफ्रेंड ने कहा- आपको हीरो बनना चाहिए। रजनीकांत खुद भी एक्टिंग सीखने की इच्छा रखते थे, तो एक दिन निर्मला ने उनका मद्रास फिल्म इंस्टीट्यूट में एडमिशन के लिए फॉर्म भर दिया, जिसकी बदौलत रजनीकांत का दाखिला हुआ था। रजनीकांत के हुनर ने खींचा डायरेक्टर का ध्यान एक्टिंग कोर्स के दौरान रजनीकांत पर तमिल फिल्म डायरेक्टर के. बालाचंदर की नजर पड़ी। के. बालाचंदर ने उन्हें तमिल सीखने की सलाह दी तो उन्होंने झट से सलाह मानकर तमिल भाषा बोलना और पढ़ना सीख लिया, लेकिन उन्हें कभी तमिल लिखना नहीं आया। इसके बाद बालाचंदर ने ही रजनीकांत को अपनी फिल्म अपूर्वा रागंगल (1975) में कास्ट किया। इस समय रजनी 25 साल के थे। फिल्म में उन्होंने फीमेल लीड के एक्स हस्बैंड की भूमिका निभाई थी। विवादित सब्जेक्ट होने के कारण कमल हासन और श्रीविद्या स्टारर ये फिल्म चर्चा में रही और इसने तीन नेशनल अवॉर्ड जीते थे। करियर की शुरुआत में रजनी तीन साल तक निगेटिव रोल में ही नजर आया करते थे। एक्टिंग छोड़ना चाहते थे रजनीकांत, डिस्ट्रीब्यूटर्स ने कहा था- अब रजनी नहीं चलेंगे 70 के दशक के आखिर में रजनीकांत की कई फिल्में बैक-टु-बैक फ्लॉप हो गईं। फिल्में फ्लॉप होने से उदास रजनीकांत एक्टिंग हमेशा के लिए छोड़ना चाहते थे। उन्होंने नई फिल्में साइन करनी छोड़ दीं, वहीं कुछ डिस्ट्रीब्यूटर्स और डायरेक्टर्स ने कहा कि रजनी अब नहीं चलेंगे। इसी बीच रजनीकांत को अमिताभ बच्चन की फिल्म डॉन की तमिल रीमेक फिल्म बिल्ला मिली। रजनीकांत, अमिताभ बच्चन को अपनी एक्टिंग इंस्पिरेशन मानते थे, तो वे एक्टिंग छोड़ने के बावजूद फिल्मों में लौटने के लिए राजी हो गए। 1980 में रिलीज हुई बिल्ला में डॉन बनकर रजनीकांत ने वो कमाल कर दिया कि फिल्म 25 हफ्तों तक सिनेमाघरों से नहीं उतरी। फिल्म जबरदस्त हिट रही और रजनीकांत तमिल सिनेमा के सबसे कामयाब हीरो बन गए। रजनीकांत ने शुरुआती 10 सालों में ही 100 फिल्में कर डालीं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। बिल्ला के बाद रजनीकांत ने तमिल के टॉप एक्टर्स में वो जगह बनाई, जो आज भी कायम है। समय के साथ दमदार रोल, दरियादिली और स्टाइल से रजनीकांत के फैंस बढ़ते ही चले गए। ————- बॉलीवुड की यह खबर भी पढ़िए… दिलीप कुमार की 103वीं बर्थ एनिवर्सरी:पोस्टर देखकर पिता को पता चला बेटा हीरो बना, आधी उम्र की लड़की से शादी की हुई थी भविष्यवाणी साल था 1922 का और जगह थी पेशावर। 11 दिसंबर की रात किस्सा ख्वानी बाजार की सोना बनाने वालों की गली में भयानक आग लगी थी। ठंडी, बर्फीली रात, तेज हवा और उससे भड़की आग, चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई। पूरी खबर पढ़ें..